स्वच्छ भारत अभियान: उम्मीद है लक्ष्य के नजदीक पहुंच चुका होगा

प्रवेश सिंह भदौरिया। दिनांक 15 सितंबर 2018 को राष्ट्र "स्वच्छता ही सेवा" कार्यक्रम को उत्सव की तरह मना रहा है।कुछ दिन बाद 02 अक्टूबर 2018 को भारत वर्ष स्वच्छ भारत अभियान की चौथी वर्षगाँठ मनायेगा। 04 साल बाद हम लोग मोदी सरकार की "गांधी समर्पित" योजना का आंकलन कर सकते हैं क्योंकि ये समय वर्तमान सरकार के किसी भी योजना के सकारात्मक-नकारात्मक पहलू पर बात करने के लिए एकदम सही है हालांकि आम चुनाव होने में अभी भी लगभग 07 माह का वक्त है।

भारत एक विकासशील देश है और जनसंख्या की दृष्टि से यह दूसरा सबसे बड़ा देश है हालांकि क्षेत्रफल की दृष्टि से इसका स्थान 7वां है अतः अन्य विकासशील देशों की तरह भारत में भी मुख्य समस्या साफ पीने का पानी, पर्याप्त खाना व सुरक्षित आश्रय की बनी हुई है (जनसंख्या की अत्यधिकता के कारण)।

भारत में प्रायः यह देखा गया है कि लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च होता है और भारत में बिमारियों का एक प्रमुख कारण गंदगी रहा है।अतः किसी भी राष्ट्र को स्वस्थ रखने के लिए उसका स्वच्छ रहना अत्यंत आवश्यक है।

किंतु भारत जैसे बड़े देश में जिसमें भिन्न-भिन्न धर्म-भाषा-संस्कृति को मानने वाले लोग हैं उन्हें एक सूत्र में कैसे पिरोया जाये अर्थात सबको स्वच्छता का ज्ञान व समझ कैसे दिलाई जाये ये एक बड़ी समस्या थी।जिसे ना केवल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  ने चतुराई से लागू किया बल्कि उसे प्रत्येक घर के,प्रत्येक सदस्य के जीवन का अभिन्न अंग भी बना दिया।उन्होंने ना केवल जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को स्वच्छता संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया बल्कि स्वयं भी प्रतीकात्मक रुप से हाथ में झाड़ू लेकर लोगों को प्रोत्साहित करते रहे हैं।
इसी आंदोलन का परिणाम है कि लेख लिखे जाने तक 19 राज्य व 442 जिले "खुले में शौच" की आदत से मुक्त हुए हैं।जिससे कई गंदगी जनित बिमारियों के मरीजों की संख्या में कमी आई है।

उम्मीद है यह अभियान अपने लक्ष्य वर्ष 2019 को महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर "गांधी के सपनों का स्वच्छ भारत" को पूर्ण करने के काफी नजदीक पहुंच चुका होगा और भारत वर्ष स्वच्छता के मापदंड पर फिर से "सोने की चिड़िया" कहलायेगा।

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