SEHORA: बारिश के पहले अवैध रेत का भंडारण जिम्मेदार मौन

प्राची नारायण मिश्रा/सिहोरा। एक तरफ नदियों के संरक्षण और मिट्टी के कटाव के लिए वृक्षारोपण करने की घोषणायें की जा रही हैं वही लगातार नदियों को छलनी करके बेखौफ रेत निकाली जा रही है जिसका भंडारण गांव में खुलेआम करके रखा गया है जिसमे सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि नदियों का उत्खनन करके इस तरह रेत का कारोबार करने वालों की जानकारी क्या खनिज विभाग के अधिकारियों को नही है ? या फिर जानकारी होने के बाद भी कमीशन बंद होने के भय से कार्यवाही नही की जाती जो कि ग्रामीणों में चर्चा का विषय भी है।

सिहोरा तहसील के ग्राम देवरी (सतधारा) के राय मोहल्ले के पास करीब तीस से पैंतीस ट्राली अबैध रेत का भंडारण करके रखा गया है देवरी गांव क्षेत्र की जीवन दायिनी हिरन नदी से लगा हुआ है लेकिन गांव के ही रेत माफियाओं द्वारा मजदूर लगाकर किस्तीयों से रेत निकलवाई जा रही है और बारिश के दौरान बिक्री करने के लिए खुलेआम गांव में भंडारण करके रखा गया है । ज्ञात हो कि बारिश के समय रेत के दाम बढ़ जाते है जिसका फायदा लेने के लिए ज्यादातर रेत माफिया बरसात के पहले से ही रेत का भंडारण करना शुरू कर देते हैं जिससे रेत की काली कमाई में ज्यादा लाभ कमा सकें। वहीं सूत्रों की माने तो इन रेत माफियाओं की ज्यादा शिकायतें होने के बाद खनिज विभाग द्वारा एकाद वाहन में दिखावे मात्र की कार्यवाही कर दी जाती है। जिसके बाद रेत माफिया लगातार मझगवां थाना क्षेत्र के देवरी , लमतरा, कूम्ही के घाटों पर सक्रिय हो जाते हैं। जबकि रेत माफियाओं के भय की वजह से गांव के कोई भी व्यक्ति खुलकर शिकायत नही करते हैं । और प्रशानिक अमला भी सब जानते हुए मूक दर्शक बना हुआ है।

ऐसे निकाली जाती है रेत
नाम न छापने की शर्त पर क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि चार- पांच मजदूरों के समूह को एक ट्राली रेत को निकालने का ठेका बारह सौ रुपये से पन्द्रह सौ तक मे दिया जाता है और मजदूर किस्ती से भरकर रेत निकालते हैं जिन घाटों में रेत कम होती है तो मिट्टी वाली रेत की खुदाई तक करके रेत में बेच रहे हैं जिससे नदी के किनारे मिट्टी का कटाव भी होने लगता है और इन सब कारणों से नदी किनारे लगे पेड़ भी धराशायी हो रहे हैं जिसमे कार्यवाही की आवश्यकता जिससे आने वाले समय मे नदी और पेड़ो को बचाया जा सके।

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