समय की कद्र नहीं की इसलिए दूसरा मौका कतई नहीं दिया जा सकता

JABALPUR: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर निवासी कविता साहू की याचिका इस तल्ख टिप्पणी के साथ खारिज कर दी कि समय की कद्र नहीं की इसलिए दूसरा मौका कतई नहीं दिया जा सकता। कायदे से जब नीट अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर ली थी, तो काउंसिलिंग में समय पर पहुंचना था। कतिपय कारणों से काउंसिलिंग के दौरान न पहुंच पाने के आधार पर दूसरे अवसर की मांग स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है।

न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता आदित्य संघी ने रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता मैरिटोरियस छात्रा है। उसने नीट में मैरिट श्रेणी के अंक हासिल किए थे। 

वह काउंसिलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकी थी। इसलिए पंजीयन भी नहीं हो सका। लिहाजा, एक और अवसर अपेक्षित है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह डॉक्टर बनने के स्वप्न से जुड़ा बेहद गंभीर बिन्दु है। हाईकोर्ट ने तमाम दलीलों को दरकिनार करके हुए याचिका खारिज कर दी।

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