एपी एक्सप्रेस में हादसा, जवानों का मौजूद होना लोगों के लिए वरदान

GWALIOR: एपी एक्सप्रेस के एसी कोच में आग दिन में लगी, यदि यही हादसा रात में हुआ होता या ट्रेन की रफ्तार तेज होती तो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। ट्रेन ड्रायवर ने तो तत्काल ट्रेन रोककर सतर्कता दिखाई ही, साथ ही कोच में 22 आर्मी के जवानों का मौजूद होना भी लोगों के लिए वरदान साबित हुआ। क्योंकि कोच में मौजूद इन जवानों ने हादसा होने पर महिलाओं एवं बच्चों का सामान सहित तत्काल बाहर निकालने में मदद की। साथ ही लोगों को समझाईश दी कि वह घबराने की जगह आराम से नीचे उतरे, इससे भगदड़ नहीं हुई और सभी लोग सकुशल ट्रेन से बाहर आने में कामयाब हो सके।

थ्री एस के संयोग से टल गया गंभीर हादसाः
समयः ट्रेन में आग सुबह 11.15 बजे लगी, यदि रात का समय होता तो घटना गंभीर हो सकती थी। क्योंकि दिन में यात्री जाग रहे थे इसलिए धुआं उठते देख आग का पता चल गया। यदि रात होती तो एसी कोच के गेट लगे होते और यात्री गहरी नींद में होते। ऐसे में आग का पता चलता तब तक पूरे कोच में आग फैल चुकी होती। जिससे काफी जनहानि हो सकती थी।

स्टेशनः सिग्नल नहीं होने के कारण ट्रेन को बिरला नगर स्टेशन पर रोकना पड़ा था, यहां से जब ट्रेन चली तो रफ्तार काफी धीमी थी। ऐसे में जैसे ही चैन पुलिंग हुई ट्रेन तत्काल रूक गई। यदि ट्रेन आउटर में होती तो पहले तो रेसक्यू ऑपरेशन देरी से शुरू हो पाता, क्योंकि दमकल वाहनों एवं पुलिस को भी पहुंचने में समय लग जाता। इसके अलावा रफ्तार तेज होती तो चैन पुलिंग करने के बाद भी ट्रेन रूकने में समय लेती। जबकि तेज रफ्तार होने पर आग तेजी से कोचों में फैलती। ऐसे में दो से ज्यादा कोचों में आग फैल जाती और कैजुअल्टी होने की संभावना थी।

सेनाः बी-7 कोच जिसमें आग की लपटें सबसे पहले पहुंची थी, उसमें सेना के 22 जवान मौजूद थे। जवानों को जब घटना का पता चला तो यात्रियों को समझाबुझाकर शांत किया। रेसक्यू ऑपरेशन में माहिर इन जवानों ने कोच में मौजूद महिलाओं एवं बच्चों को सबसे पहले सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद सामान सहित सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। वहीं कुछ जवानों ने बी-6 कोच में मौजूद यात्रियों को बाहर निकालने में भी मदद की। समय रहते यात्रियों के बाहर आ जाने के कारण सैकड़ो यात्रियों की जान बच गई।

एपी एसी एक्सप्रेस में कुल 13 कोच थे। इसमें एसी एचए वन में 44, ए-1 से ए-5 तक के प्रत्येक कोच में 52-52 यात्री सवार थे। इसके अलावा बी-6 में 66, बी-7 में 75, बी-5 में 74 एवं बी-4 में 75 यात्री सवार थे। दो कोच आग के कारण क्षतिग्रस्त होने के बाद एपी एसी एक्सप्रेस को 3.52 बजे 11 कोच के साथ रवाना किया गया है। दो जले हुए कोच के 141 यात्रियों को अन्य कोच में एडजस्ट किया गया, झांसी से दो नए कोच लगाने के बाद यात्रियों को उनमें शिफ्ट कर दिया जाएगा।

केन्द्रीय विद्यालय बोलाराज हैदराबाद के 34 बच्चे भी एपी एसी एक्सप्रेस के बी-1, 2, 3 एवं 6 कोच में सवार थे। एक छात्र सौरभ ने बताया कि हम छात्र छात्राएं देहरादून में फुटबाल प्रतियोगिता से लौट रहे थे। दो छात्र बी-6 में थे, जैसे ही आग लगी तो टीचर काफी घबरा गए। पहले तो सभी बच्चों को इकट्ठा किया और बाहर निकाला। इसी दौरान आर्मी के जवानों ने दोनों छात्रों को हमारे हवाले किया। स्पोर्ट्स टीचर ने बताया कि आग लगने से बच्चे काफी घबरा गए थे।

पेन्ट्री कार को अलग कियाः
हादसे के बाद जब आग की लपटे पेन्ट्री कार की तरफ बढ़ने लगी तो अधिकारियों के होश उड़ गए। क्योंकि पेन्ट्री कार में गैस सिलेण्डर रखे हुए थे, इसलिए सबसे पहले सिलेण्डरों और सामान को बाहर निकाला गया। आग जब पेन्ट्री कार की तरफ बढ़ती दिखाई दी तो उसे जल रहे कोचों से अलग कर दिया गया। इसी प्रकार बी-5 कोच को भी दूसरी तरफ से अलग कर दिया गया।

पत्थरों से तोड़े कांचः
जब कोचों में आग लगी तो धुआं भर गया, ऐसे में लोगों ने पत्थर फेंककर एवं लाठियों से कांच तोड़े जिससे धुआं बाहर निकल सके। क्योंकि यदि कांच नहीं टूटते तो गैस बनने से कांच धमाके के साथ टूटकर लोगों को नुकसान भी पहुंचा सकते थे। कोचों की छत तक पिघलने लगी थी।

ओएचई लाइन टूटीः
हादसे के दौरान जब पूरी ट्रेन को खाली कराया गया तो यात्रियों में भगदड़ मची हुई थी, इसी बीच ओएचई लाइन टूटकर गिरी तो लोग और भी घबरा गए। हालांकि उसमें करंट नहीं था, लेकिन लोग उससे बचकर निकलते दिखाई दिए।

मालगाड़ी में कर रहा था कामः
एक रेलवे कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब कोच से धुआं उठा तो वह पास में खड़ी मालगाड़ी में काम कर रहा था। धुआं उठता देख दो फायर इक्युपमेंट लेकर में भागा, लेकिन देखा तो आग काफी ज्यादा फैल चुकी थी। स्टेशन पर फोन कर सूचना दी कि फायर बिग्रेड को बुलाना पड़ेगा। खुद भी प्रयास किए लेकिन फोन नहीं लगा। इसके बाद मैने ही कोचों को काटकर अलग किया है।

नहीं खुला दूसरा गेटः
एपी एसी एक्सप्रेस में जहां आग लगी वहीं पास में अप ट्रैक पर ही एक मालगाड़ी खड़ी हुई थी। ऐसे में लोगों को बाहर निकलने में भी खासी परेशानी हुई। क्योंकि केवल बिरला नगर पुल की तरफ खुलने वाले गेट का ही लोग इस्तेमाल कर पा रहे थे।

खौफ के पलः

वर्जनः
1.मैं बी-7 कोच में 72 नंबर बर्थ पर था। अचानक एक लड़के ने चैन पुलिंग की, इसके बाद गार्ड दौड़ता हुआ आया। पहले बोला कि अंदर ही रहो, फिर सबने भागना स्टार्ट कर दिया। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है। आर्मी के कुछ जवान आए और हमारी मदद की। हमें सामान सहित कोच से बाहर निकाला। हमारा एक बैग भी ट्रेन में छूट गया, जिसमें कैश और करीब 5 तौले सोने के जेवर थे।
रमेश के, निवासी इलील

2.अचानक टॉयलेट से धुआं उठने लगा, ट्रेन रूक गई तो मैं देखने के लिए पहुंचा। देखा तो गाड़ी को चैक किया जा रहा था, गर्मी बहुत बढ़ गई थी। थोड़ी देर में अफरा तफरी मच गई। मैने भी जल्दी से पत्नी और बच्चों को साथ लिया और गेट पर पहुंचकर पहले पत्नी को नीचे उतारा। उसे बच्चों को थमाया और नीचे कूद गया। तब तक आग की लपटें उठने लगी थी।
ख्वाजावली शेख, यात्री

टिकट चैक कर रहा थाः
3.जब आग लगी तो मैं बी-4 में टिकट चैक कर रहा था, इसी दौरान यात्रियों ने आकर बताया कि बी-7 कोच में धुआं उठ रहा है। किसी पैसेंजर ने चैन पुलिंग भी कर दी थी। इसके बाद हमने पहुंचकर सभी पैसेंजरों को बाहर निकाला। हमें तो यही पता चला कि टॉयलेट में धुआं उठता देखा गया है।
डीएस बुंदेला, टीटीई

4.हम लोग आर्मी से हैं और बी-7 कोच में सवार थे। बाथरूम से धुआं उठता देखा फिर अफरा तफरी शुरू हो गई। स्मैल आना शुरू हुई तो हमने सबसे पहले बच्चों एवं महिलाओं को कोच से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

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