औरत को खिलौना समझने वालों को जमानत नहीं: हाईकोर्ट

JABALPUR: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि औरत को खिलौना समझने वालों को जमानत नहीं दी जाएगी। यह मामला एक परेशान औरत को बहकाकर एकांत में ले जाने और फिर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के जघन्य आरोप से संबंधित है, अतः जमानत आवेदन खारिज किया जाता है। मंगलवार को न्यायमूर्ति एचपी सिंह की समर वेकेशन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान आवेदक पनागर निवासी भागचंद सहित अन्य की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। सामूहिक दुष्कृत्य जैसी कोई घटना वास्तव में हुई ही नहीं है। इसके बावजूद अनुसूचित जाति की महिला ने एससी/एसटी एक्ट के अलावा रेप का चार्ज लगवाकर एफआईआर दर्ज करवा दी। पुलिस ने प्रकरण कायम करने से पूर्व अपने स्तर पर समुचित जांच नहीं की। लिहाजा, जमानत प्रदान की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि आरोपी अपनी बेगुनाही साबित कर सकें।

आवेदकों की ओर से प्रस्तुत तर्कों के विरोध में शासकीय अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि 28 अप्रैल को पीड़िता जबलपुर से सिहोरा जाने के लिए स्टेशन के समीप भटक रही थी। वह परेशान हाल थी। इसी बात का फायदा उठाकर भागचंद ने उसे अपने जाल में फंसाया और बाइक में बैठाकर सिहोरा छोड़ने की बात कही।

महिला भोली-भाली थी और उसके झांसे में आ गई। जब महिला मोटरसाइकल में बैठ गई तो भागचंद ने अपनी गाड़ी मझौली रोड की तरफ मोड़ ली। वह अपने दोस्त के यहां पहुंचा। वहां पहले से जुगराज मौजूद था। उसने गोविन्द को बुला लिया। भागचंद महिला को दोस्त के घर पर छोड़कर दोस्त के साथ कहीं निकल गया। रात्रि 9 बजे वह दोस्तों के साथ लौटा। सभी महिला को इमलिया में खेत के बीच स्थित टपरिया में ले गए। वहां सबने मिलकर दुष्कर्म किया। बदहवास औरत ने थाने जाकर अपनी व्यथा सुनाई, जिसके बाद पुलिस ने अपराध कायम किया।

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