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अनुग्रह राशि के लिए दो साल से भटक रहा है मृतक का परिवार

जनपद अम्बाह के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पुरावसकलां के मंशाराम बघेल बिगत दो साल से अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद संबल योजना के तहत मिलने वाली अनुग्रह राशि के लिए भटक रहे हैं। मंशाराम बघेल का परिवार मध्यप्रदेश शासन की संबल योजना के अंतर्गत पंजीकृत है। संबल योजना के तहत पंजीकृत परिवार के किसी सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु होने से मध्यप्रदेश शासन की ओर से परिवार को चार लाख रूपए की अनुग्रह राशि दिए जाने का प्रावधान है। मंशाराम बघेल की पत्नी रामबेटी की मृत्यु एक सड़क दुर्घटना में 18 अप्रैल 2019 को हो गई थी। उनकी श्रमिक आईडी 116964811 है। उन्होंने 29 दिसंबर 2020 को संबल योजनानुसार मिलने वाली अनुग्रह राशि के लिए आवेदन किया था परंतु दो साल बीत जाने के बाद भी मृतक के परिवार को अनुग्रह राशि के लिए जनपद कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जनपद अम्बाह में संबल योजना के अंतर्गत मृतक के परिजनों को अनुग्रह राशि मिलने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक उदासीनता और योजनाओं में फैला भ्रष्टाचार इसका एक बड़ा कारण है। जिसके कारण मृतक के परिजनों को आर्थिक एवं मानसिक कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है। ग्राम पंचायत पुरावसकलां की मृतक रामबेटी बघेल के पति मंशाराम एवं उनका परिवार भी बीते दो सालों से ऐसी ही कठिनाईयों से गुजर रहे हैं।

गौरतलब है कि मंशाराम बघेल बीपीएल कार्डधारी हैं। वे दो बार सीएम हेल्पलाइन में अनुग्रह राशि दिलाने के लिए आवेदन कर चुके हैं। हर प्रयास में उनको निराशा ही हाथ लगी है। सीएम हेल्पलाइन में अधिकारियों के द्वारा दर्ज निराकरण में मृतक रामबेटी को संबल योजना की अनुग्रह राशि के लिए 07 अक्टूबर 2020 में ही अपात्र दर्शाया जा रहा है जबकि 29 दिसंबर 2020 को पंचायत अधिकारियों की ओर से अनुग्रह राशि हेतु सफलतापूर्वक आवेदन हो चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि जनपद कार्यालय के अधिकारियों द्वारा अपनी गलती पर पर्दा ड़ालने एवं सीएम हेल्पलाइन को गुमराह करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गौर करने की बात यह भी है कि नगर पालिका अम्बाह में संबल योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुग्रह राशि से संबंधित कई प्रकरण ऐसे भी हैं जिनमें आवेदन ऑनलाइन करने के बाद अनुग्रह राशि के लिए आवेदन तत्काल स्वीकृत हुए हैं परंतु मंशाराम बघेल इसी योजना की अनुग्रह राशि के लिए बिगत दो साल से जनपद कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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