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देश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था

विवेक रैकवार (सागर, मध्यप्रदेश) (8120818959)।
आज देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर का सामना कर रहा है  देश ने पहली लहर से सबक नही लिया.जनता और देश के राजनेताओ ने लापरवाही में कोई कसर नही छोड़ी देश के लोग बेफिक्र हो गए और राजनेता चुनाव में ताबड़तोड़ रैलियां करने लगे और कोरोना बढ़ता रहा ना कोई मीटिंग ना कोई टास्क फोर्स ना दूसरी लहर से निपटने की तैयारी। 

अंततः परिणाम क्या हुआ लोग काल के गाल में समा गए और दिन के 4 लाख से ज्यादा केस रिकॉर्ड किये गए। लोग ऑक्सीजन, हॉस्पिटल में बेड की कमी व दवाइयों की कमी से जूझते दिखाई दिये सरकारों ने क्या किया सिर्फ आरोप प्रत्यारोप का खेल खेला गए जनता खुद ही ऑक्सीजन ढूंढती रही खुद ही ऑक्सीजन और अपने पेसेंट का शव तक खुद उठाया , और गंगा मैया में शव तैरते नज़र आये. आप अंदाजा लगा लीजिए क्या भयानक मंजर से हम गुजरे है।

अब बात करते है देश के स्वास्थ व्यवस्था की तोह दुनिया के 195 देशों की रैंकिंग में भारत 145 नंबर पर है (2018 में HAQ रिपोर्ट  अनुसार). W.H.O.  के मानक अनुसार 1000 लोगो पर 1 डॉक्टर होना चाहिए लेकिन हम इस आंकड़े के आस पास भी नही देश मे 11,082 लोगो की आवादी पर 1 डॉक्टर है बिहार में 28000 लोगो पर 1 डॉक्टर है उत्तरप्रदेश में 20221 लोगो पर एक डॉक्टर है.भारत मे 11,42000 एलोपैथी डॉक्टर रजिस्टर्ड है देश मे 9 एम्स है 21 प्रस्तावित है. देश मे 23,582 सरकारी अस्पताल है जिसमे 8 लाख बेड है, WHO क्या कहता है भारत जैसी आबादी के लिए नियम- 
● 5000 की आबादी पर एक स्वास्थ सब सेंटर
● 3000 की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ केंद्र
● 1,20000 की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए
भारत मे 1,57411 हेल्थ सब सेंटर है
भारत में 24855 प्राथमिक सब सेंटर है
भारत मे 5335 सामुदायिक स्वास्थ केंद्र है 
भारत मे 1 अरब 35 करोड़ की आबादी पर 40000 वेंटिलेटर हैं
भारत मे 94961 ICU बेड है
भारत ने 1700 लोगो पर 1 बेड है
और हम आज अपनी जीडीपी का मात्र 2.5 % खर्च करते है, देश मे 65% लोगो तक स्वास्थ सुविधाएं नही पहुँच पाती इस बात से आप अंदाजा लगा सकते है हमारी स्वास्थ व्यवस्था के क्या हाल है ओर लोगो की मौतों का जिम्मेदार कौन है ये लचर स्वास्थ व्यवस्था ही है।
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