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15 साल का संघर्ष और जनता का फैसला (अजय सिंह विशेष)

विवेक बघेल। जब उमा भारती की लहर चली और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ तब यह लगा था कि शायद अब कांग्रेस की वापसी कभी नहीं होगी। दिग्विजय सिंह अपने वादे के अनुसार केन्द्र में सक्रिय हो गए। मध्य प्रदेश में जमुना देवी के रूप में नेता प्रतिपक्ष मिला जो सरकार से संघर्ष करती रहीं और उनके स्वर्गवासी होने के बाद नेतृत्व की कमी महसूस हुई। उमा भारती का दौर गुजर चुका था और अब दौर था शिवराज सिंह चौहान का जिन्होनें अपने करिश्माई नेतृत्व से भाजपा को आसमान तक पहुंचा दिया। 

कांग्रेस संकटकाल से गुजर रही थी और उसे दरकार थी ऐसे चेहरे की जो सरकार के तंत्र से न डरते हुए सरकार को चुनौती पेश करे। ऐसे में कांग्रेस की तलाश खत्म हुई अजय सिंह के रूप में। अजय सिंह जो कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र और चुरहट विधानसभा से विधायक थे। अजय सिंह ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी एक नई छाप छोड़ी। सदन से लेकर सड़क तक शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा किया। मानहानि का मुकदमा झेला पर झुके नहीं।शिवराज सरकार अजय सिंह के अविश्वास प्रस्ताव से डरने लगी। अजय सिंह सरकार के व्यक्तिगत निशाने पर आ चुके थे। प्रभात झा ने अजय सिंह को जमीन घोटाले में फंसाने की भरपूर कोशिश की पर सफल नहीं हुए। 2013 का परिणाम फिर से कांग्रेस के प्रतिकूल आया। कार्यकर्ता निराश हो चले थे और नेता प्रतिपक्ष के रुप में ताज़पोशी हुई सत्यदेव कटारे की। सामान्य तरीके से सब कुछ चल रहा था। ऐसा लगता था कि कांग्रेस न तो सड़क पर है और न सदन में। 

सत्यदेव कटारे के निधन के बाद एक बार फ़िर से कांग्रेस की नज़र अजय सिंह पर टिकी और अजय सिंह को फिर से नेता प्रतिपक्ष का दायित्व सौंपा गया। इस बार अजय सिंह ने दुगुने उत्साह से सरकार पर हमला शुरू किया। अवैध रेत उत्खनन से लेकर ई-टेंडरिंग घोटाला तक अजय सिंह ने सरकार की नाक में दम कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव का खौफ शिवराज सरकार को इस कदर था कि विधानसभा सत्र 2 दिन में समाप्त करना पड़ा।अजय सिंह में लोग मुख्यमंत्री का चेहरा देखने लगे। पर शायद नीयत को कुछ और मंजूर था। 15 वर्षों तक सरकार से संघर्ष करने वाले अजय सिंह 2018 विधानसभा चुनाव में चुरहट से हार गए। 

सरकार कांग्रेस की बनीं पर जिसने कांग्रेस को जिन्दा रखा उसे जनता के फैसले ने विपरीत परिणाम दिया। पर अजय सिंह इस परिणाम को शिरोधार्य करते हुए कहते हैं कि "शायद सेवा भाव में कुछ कमी रही होगी इसलिए जनता ने आशीर्वाद नहीं दिया।जनता की सेवा में मैं सदैव जनता के साथ खड़ा रहूंगा।" यह एक अच्छा राजनेता और जनसेवक ही सोच सकता है।
-चुरहट विधानसभा का निवासी