निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 24-28 घंटे के अंदर मरीज कोमा में भी चला जाता है।

GWALIOR: चमगादड़ के जरिए केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 11 लोगों की मौत हो गई। इस बीमारी का प्रदेश में अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन प्रदेश के पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। विभाग ने कहा है कि रहवासी जिन इलाकों में चमगादड़ हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। यदि किसी जगह चमगादड़ की मौत होती है, तो सुरक्षित तरीके से उसको नष्ट किया जाए।

शहर के एमएलबी कॉलेज, गजराराजा, हरिदर्शन स्कूल, देव वन और किले पर काफी चमगादड़ों का वास है। हालांकि जिला प्रशासन ने अभी इस मामले को लेकर कोई तैयारी नहीं की है। वहीं सीएमएचओ ने स्वयं संज्ञान में लेते हुए जेएएच और जिला अस्पताल को अलर्ट पर रखने की बात कही है। सीएमएचओ डॉ.एसएस जादौन का कहना है कि जिला अस्पताल और जेएएच अधीक्षक को पत्र लिखा जाएगा कि वह निपाह वायरस के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए प्रबंध करें। अगर कोई संदिग्ध मरीज आता है तो उसे भर्ती करने तथा इलाज के समुचित प्रबंध करें। उधर, जेएएच के सहायक अधीक्षक डॉ. जितेंद्र नरवरिया का कहना है कि जेएएच में मरीजों के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था है। 

कुतरे हुए फल न खाएं
जीआरएमसी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर अजय पाल सिंह ने बताया कि चमगादड़ व सूअर से बचाव रखें। जो फल कीड़ों या पक्षी द्वारा कुतरे हुए हों ऐसे फलों का सेवन न करें। जिन पेड़ों पर चमगादड़ रहती हैं उनके नीचे न बैठें। बुखार व सिर दर्द होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।

क्या होता है निपाह वायरस...डब्लूएचओ के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों व जानवरों पर आक्रमण करता है। 1998 में मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। भारत में इससे पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नादियाें में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है।

निपाह वायरस के लक्षण
निपाह वायरस से संक्रमित मनुष्य को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, बेहोशी आना, उल्टी होना, झटके आना, मानसिक भ्रम और कोमा होता है। निपाह वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और साथ में जलन महसूस होती है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत भी हो सकती है। इंसानों में निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से दिमाग में सूजन आ जाती है। मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप प्रजापति के मुताबिक कुछ मामलों में 24-28 घंटे के अंदर लक्षण बढ़ने पर मरीज कोमा में भी चला जाता है। इसमें मरीज की मौत भी हो सकती है।

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