नरेन्द्र ही धुरंधर है

वाराणसी से माननीय प्रधानमंत्री जी लगातार दूसरी बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं व उनके ही केबिनेट के विश्वासपात्र व मेहनती मुरैना जैसी कठिन सीट से बीजेपी के प्रत्याशी ने भी चंबल संभाग में अपना दम दिखाया है और सिंधिया के करीबी रामनिवास रावत को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया है। 

ये चुनाव असल में "मोदी विरुद्ध सब" बन गया था।जिस प्रकार से ना केवल बिना घोटालों की सरकार को राफेल के तथाकथित घोटाले में फंसाने का प्रयास किया गया बल्कि "चौकीदार चोर है" के नारों को राष्ट्र ने सिरे से खारिज कर दिया। मध्यप्रदेश में भाजपा ने ना केवल चमात्कारिक प्रदर्शन किया बल्कि "अजेय" लगने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी संगठन की मेहनत के दम पर पराजित किया।

विधानसभा चुनाव में ग्वालियर चंबल संभाग में बुरी तरह हारने वाली भाजपा के लिए संगठन ने जिस तरह से नरेंद्र सिंह तोमर को फिर से जिताने की जिम्मेदारी दी वो एक तरह का मास्टरस्ट्रोक ही साबित हुआ।भिंड हो या कमजोर प्रत्याशी का आरोप झेलने वाली ग्वालियर सीट पर ना केवल उन्होंने जीत दिलवाई बल्कि गुना सीट को भी कांग्रेस से छीन लिया।यह उनकी कुशल नेतृत्वक्षमता का ही कमाल है कि दूर से हार दिखने के बावजूद जिस तरह से शतरंज की बिसात पर उन्होंने गोटियां जमाईं और चालें चलीं उससे विरोधी को ज्यादा कुछ समझ ही नहीं आया।

इस जीत से एक बार फिर मध्यप्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने अपने संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया है व इस जीत से व ज्योतिरादित्य जी के हारने के बाद अब वे ही सिर्फ मध्यप्रदेश के राजनीति के केंद्र ग्वालियर चंबल संभाग के एकमात्र सर्वमान्य नेता साबित हुए हैं।

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