लोकसभा चुनाव २०१९ का विरोध एवं बहिष्कार

अरुण सिंह चंदेल। बुंदेलखंड विकास दल ने अपना सफर १९८८-८९ में पृथक राज्य बुंदेलखंड के सपने से किया था। पथ यात्रा ,धरना ,जुलूस और प्रदर्शन आदि के साथ दल समय के साथ आगे बढ़ता गया।दल के संस्थापक श्री शिव नारायण खरे की देखरेख में पार्टी ने पृथक राज्य बुंदेलखंड के उद्देश्य के साथ १९९३ में चुनाव लड़ा। बुंदेलखंड में सभी पार्टियों और सामाजिक संस्थाओ को एक मंच में सर्वप्रथम इसी दल ने शुरुवात की। इसी का परिणाम झाँसी बंद श्री भानू सहाय के साथ देखने को मिला  और फिर सतेन्द्र प्रताप सिंह के साथ भी देखने को मिला। लेकिन कुछ अन्य मोर्चो व संघठनो ने दूरी बनाई।

दल ने करीब ढाई साल बुंदेलखंड की राजनीति से वनवास में बिताया ,विरोधियो की वजह से पार्टी को पुनः राजनितिक साख को समटने में यह समय गवाना पड़ा। आज जब दल  लोकसभा २०१९ में उतरा तो बाँदा में दल के प्रत्याशियों को धमका कर चुनाव से अलग कर दिया ,जालौन में निर्वाचन कार्यालय जाने से रोका ,अंतिम दिन वो भरने लायक नहीं रह गया ,अकबरपुर में निर्वाचन अधिकारियो व पुलिस  ने मिलकर षड्यंत के तहत नामांकन रद्द करा दिया। अन्य चुनाव लड़ने वालो ने  धमकियों व बाहुबलियों के डर से पलायन किया,पूछने पर कारण कुछ और बताये।

दल उपरोक्त बातो को देख कर लोकसभा २०१९ चुनाव को लोकतान्त्रिक तरीके का चुनाव नहीं मानती है। इस लिये बुंदेलखंड विकास दल इस चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करती है। दल सभी उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीटों पर अब प्रत्याशी नहीं लड़ायेगी,सभी भाइयो और बहनो से इस चुनाव के विरोध में नोटा में वोट डाल कर विरोध करने की अपील करती है।बुंदेलखंड पृथक राज्य की मांग में हम आप के साथ हे,समस्त पार्टिया आप को धोखा दे रही है । बुंदेलखंड विकास दल इस चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करती है. 
अरुण सिंह चन्देल ,राष्ट्रिय अध्यक्ष ,बुंदेलखंड विकास दल।

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