उपन्यास को आदि से अंत तक साधना एक श्रम साध्य कार्य - ओम भारती

भोपाल | साहित्य में उपन्यास लेखन एक दुरूह कार्य है ,इसे आदि से अंत तक साधना और रोचकता के साथ पाठक को जोड़े रखना उपन्यास लेखक के लिए किसी चुनौती से कम नहीं ,और इस चुनौती को अपने अनुभव और लेखकीय कौशल से सफलता पूर्वक पूरा किया है उपन्यासकार द्वय कुमार सुरेश एवम अरुण अर्णव खरे ने उनके उपन्यास सिर्फ पठनीय ही नहीं अपितु समाज को सन्देश देने में भी सफल हुए हैं ,यह उदगार हैं वरिष्ठ कथाकार कहानीकार श्री ओम भारती के वे सरोकार साहित्य सम्वाद द्वारा व्यंग्यकार कुमार सुरेश के व्यंग्य उपन्यास 'तंत्र कथा' एवम साहित्यकार अरुण अर्णव खरे के उपन्यास 'कोचिंग @कोटा ' पर विमर्श के अवसर पर स्वराज भवन में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे | इस अवसर पर आधार वक्तव्य देते हुए व्यंग्यकार शांति लाल जैन ने दोनों उपन्यासकार और समीक्ष्य कृतियों पर अपनी बात रखी | 

वरिष्ठ समीक्षक साहित्यकार ओम भारती ने व्यंग्य उपन्यास 'तंत्र कथा ' पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए कहा कि - 'प्रशासनिक तंत्र की आंतरिक विसंगतियों और तनावों को सहजता से प्रस्तुत करता अपने समय का महत्वपूर्ण उपन्यास है ,प्रसाशनिक विसंगतियों विद्रूपताओं राजनीति में व्याप्त भ्र्ष्टाचार को पूरी निर्ममता से बेनकाब करता है , अपने समय का बेहद महत्वपूर्ण व्यंग्य उपन्यास लेखक को बधाई ,इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार अरुण अर्णव खरे के उपन्यास ' कोचिंग @कोटा 'पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ कथाकार मुकेश वर्मा ने कहा कि ' यह उपन्यास एक अछूते और अनूठे विषय को लेकर लिखा गया है ,उपन्यास मार्मिक प्रसंगों को बड़ी निपुणता से उकेरता है, शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कोचिंग संस्थानों की व्यथा कथा को प्रस्तुत करता महत्वपूर्ण उपन्यास है | 

इस अवसर पर उपन्यासकारों ने इन उपन्यासों से अपने चुनिंदा अंशों का पाठ भी किया | कार्यक्रम में भाग लेते हुए घनश्याम मैथिल 'अमृत' ने तंत्र कथा पर चर्चा करते हुए इस उपन्यास को विसंगतियों पर प्रहार करने वाला अनूठी कृति बताया जिसकी भाषा प्रभावी है | कार्यक्रम का सफल संचालन गोकुल सोनी जी ने किया | आयोजन में जया आर्य ,डॉ निहारिका रश्मि ,डॉ मौसमी परिहार ,कान्ति शुक्ला, महेश सक्सेना , अशोक धमेनिया ,ममता तिवारी ,युगेश शर्मा आदि अनेक साहित्यकार उपस्थित थे |

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