NEEMUCH NEWS: अफीम द्वितीय चरण की तुलाई अब तक शुरू नहीं हुई

नीमच (कमलेश सारड़ा)। अफीम तुलाई को लेकर नारकोटिक्स की मशक्कत चल रही है। नीमच में प्रथम खंड की तुलाई पूर्ण हो चुकी है। जिसके तहत 116 गांव के 3564 किसानों ने कुल 26517.050 किलोग्राम अफीम की तुलवाई करवाई है। वहीं द्वितीय चरण की तुलाई भी शुरू हो गई है। नारकोटिक्स विभाग की ओर से किसानों को 10 आरी के पट्टे दिए गए हैं। किसानों को 5 किलो 800 ग्राम औसत अफीम पट्टा बचाने के लिए देना अनिवार्य है। अफीम औसत को लेकर किसान चिंतत नहीं है। उनकी चिंता 10 आरी में 590 ग्राम मार्फिन को लेकर है। वहीं डोडाचूरा भी किसानों के लिए आफत की घंटी बना है। वह न तो डोडाचूरा को बेच सकते है और न ही नष्ट कर सकते है। जिसके चलते दो साल से वह डोडाचूरा को संभालकर चल रहें है। तीसरे साल भी इसको लेकर कोई राहत भरी खबर आती नजर नही आ रही है।

बम्मोरा गांव निवासी किसान मांगीलाल पाटीदार ने बताया कि उनके पास अफीम काश्तकारी के पुश्तैनी से पट्टे है। जिसके चलते वह लगातार खेती करते चले आ रहे है। नारकोटिक्स विभाग को तो सिर्फ अफीम लेने से मतलब है। किसान की पिछले दो दशको में अफीम लेने की मात्रा दोगुनी कर दी है। आज 59 किलोग्राम अफीम दस आरी की खेती पर ली जा रही है। जिसमें मार्फिन की मात्रा के अनुसार ग्रेडिग दी जा रही है। अब यह जांच कैसे होती है, किसे भी पता नहीं है। शुद्ध अफीम के बाद भी मार्फिन नहीं निकल रही है। किसान करीब 70 से 80 किलोग्राम अफीम लेकर पहुंच रहा है, जो कि जांच के बाद शुद्ध रूप से ५९ किलोग्राम आंकी जाती है। वर्ष 2012 में सिर्फ 50 रुपए बढ़े थे, उस वक्त करीब 40 किलो अफीम ली जाती थी, आज 59 किलोग्राम ले रहें हैं। अभी 800 से 3500 रुपए अफीम की दर मिल रही है। अभी नवीनतम कृषि के चलते खाद और दवाई के उपयोग से किसान अफीम की मांग की मात्रा को पूरा कर रहा है। सरकार की और से मुश्किल से 10 हजार रुपए अफीम का मिलता है। जबकि खर्च को देखे तो 10 हजार की दवाईयां और 7 से 8 हजार मजूदरी तथा देशी खाद के उपयोग में 10 हजार खर्च हो जाते है। किसान के तीस से चालीस हजार खर्च होते है। डोडाचूरा पहले सहारा था। करीब उससे भी दस हजार की बचत होती है। अब सिर्फ पोस्ता बिकने पर ही काश्तकार को शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। उसमें भी काफी दिक्कते है। दस आरी में करीब 70 से 80 किलो पोस्ता बैठता है। जिससे तीस-चालीस हजार की बचत हो जाती है। इसीलिए काश्तकार इतनी मशक्कत करता है।

डोडाचूरा बना गले की फांस

काश्तकारो का कहना है कि दो साल से डोडाचूरा का नष्टीकरण नहीं हो रहा है। जिसके चलते यह उनके गले की फांस बना है। डोडाचूरा का परिवहन भी नहीं किया जा सकता है और न ही इसे बेचा जा सकता है। उसके बाद इतना सारा डोडा कब तक किसान संभाल कर रखे। यह भी बड़ी मुसीबत बना हुआ है। किसान को डोडे का ठेका होने पर करीब दस हजार का फायदा होता था। वह भी नुकसान हो रहा है। वहीं चोरी और एनडीपीएस एक्ट का डर सदैव बना रहता है।

जिले में अफीम किसान 11 हजार 583

नीमच जिले को नारकोटिक्स ने तीन डिवीजन में बांट रखा है। जिसमें नीमच फस्र्ट डिवीजन में नीमच और जावद का क्षेत्र आता है। जिसमें 178 गांव और 3 हजार 572 काश्तकार है। नीमच सैंकड डिवीजन में रामपुराए सिंगोली और जीरन क्षेत्र आते है। जिसमें 138 गांव में 4 हजार 511 काश्तकार है। नीमच थर्ड डिवीजन में मनासा क्षेत्र आता है। जिसमें 130 गांव और 3 हजार 502 किसान है।

यह डोडाचूरा के नष्टीकरण का पेच 

आबकारी अधिकारी अनिल सचान ने बताया कि नियमों के तहत डोडाचूरा का परिवह खेत से भी नहीं किया जा सकता है। अगर परिवहन करते पकड़ा गया तो एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई होती है। जो कि सजा का कड़ा प्रावधान है। लेकिन दो साल से डोडाचूरा न तो खरीदा जा रहा है और न नष्ट किया जा रहा है। किसान उसे खेत में नहीं छोड़ सकता है। वह घर या गोदाम में रखता है तो परिवहन करना पड़ता है। यह भी उसके लिए मुसीबत है। जिसका भी उसे सदा डर बना रहता है। वर्ष 2017 में धारा 37 एनडीपीएस एक्ट के तहत पोस्ता भूसा नियम अप्रेल से जून तक ठेके पर देने की व्यवस्था हुई थी। जो कि आबकारी विभाग के माध्यम से ही होता था। लेकिन पिछले दो साल से उस पर भी रोक लग गइ्र्र है। इसका मुख्य कारण यह है कि नीमच-मंदसौर क्षेत्र में पूर्व में डोडाचूरा नशा के एडिक्ट थे। वह जिला अस्पताल के सीएमओ से जांच कराकर प्रमाणपत्र बनाकर दस रुपए में डोडाचूरा प्राप्त करने का लाइसेंस प्राप्त करते थे। जांच के दौरान उसके शरीर को कितनी मात्रा में डोडा नशा चाहिए है, उसके अनुसार मात्रा तय होती थी। अब धीरे-धीरे कर एडिक्ट की संख्या समाप्त हो गई। जिसके चलते यहां पर डोडा का ठेका होना बंद हो गया। राजस्थान और पंजाब में डोडा नशा के एडिक्ट थे। उनके लिए ठेका होता था। वह भी दो साल पहले समाप्त कर दिया गया है। गत वर्ष में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने डोडाचूरा सरकार द्वारा किसानों से खरीदकर नष्टीकरण का प्रस्ताव बनाया था और वित्त मंत्रालय को भेजा था। जिस पर आज तक दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए है। अब प्रदेश सरकार बदल गई है, वहीं लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते अभी निर्णय होना भी संभव नहीं है। हालांकि जिला कलेक्टर ने इसके लिए सरकार से पत्राचार भी किया है।

40 हजार कंटेनर अफीम पहुंची

अफीम फैक्ट्री में अब तक 40 हजार कंटेनर अफीम अभी तक पहुंच चुकी है। कुल 51 हजार कंटेनर अफीम फैक्ट्री में आएंगे। 3 मई तक शेष 11 हजार कंटेनर भी अफीम फैक्ट्री तक आ जाएंगे। अभी अफीम जांच प्रारंभ नहीं की गई है।
आनंद कुमार, महाप्रबंधक अफीम फैक्ट्री

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