रेडियो फ्रिक्वेंसी से चलने वाले स्मार्ट मीटर को छेड़ना पड़ेगा महंगा

INDORE: बिजली चोरी रोकने के लिए लगाए जा रहे रेडियो फ्रिक्वेंसी से चलने वाले स्मार्ट मीटर को छेड़ना उपभोक्ता को महंगा पड़ेगा। किसी ने इनमें गड़बड़ करने की कोशिश की तो कंपनी के कंट्रोल रूम में पता चल जाएगा। सर्विस क्रमांक, उपभोक्ता के नाम सहित जानकारी सेंट्रल सर्वर तक पहुंच जाएगी। कंपनी अधिकारी के मोबाइल पर भी अलर्ट पहुंचेगा और वह मोबाइल से ही उक्त कनेक्शन काट सकेगा। बिजली कंपनी शहर में 75 हजार स्मार्ट मीटर लगा रही है।

इस प्रोजेक्ट पर 70 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। शुरुआती दौर में अधिकतम लाइन लॉस वाले 15 जोन में मीटर लगाए जाएंगे। कंपनी को जहां ज्यादा लॉस हो रहा है या रीडिंग, बिलिंग और वसूली में ज्यादा समस्या हो रही है, वहां मीटर लगाने का काम शुरू होगा। बिजली व मीटर निर्माता कंपनी के बीच करीब आठ बार बैठक हो चुकी है और मीटर की विशेषताएं बढ़ाने के लिए लगातार मशक्कत कर रही है।

इस तरह पता चलेगी चोरी
स्मार्ट मीटर से उपयोग की गई बिजली के आंकड़े डेटा कलेक्टर तक पहुंच जाएंगे। इनसे कंट्रोल रूम स्थित सेंट्रल सर्वर को जानकारी भेजी जाएगी और इस आधार पर बिलिंग होगी। अधीक्षण यंत्री सुब्रतो रॉय ने बताया कि स्मार्ट मीटर दिन में कितनी भी बार रीडिंग लेने में सक्षम हैं। एक रीडिंग रात 9 बजे होगी और दूसरी सुबह 6 बजे। इस बीच खपत नहीं हुई तो जाहिर है कि उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहा है।

स्मार्ट मीटर की खासियत
मीटर में लगे रिमोट डिस्कनेक्शन यूनिट से कंट्रोल रूम या मोबाइल से कनेक्शन काटा जा सकेगा।
उपभोक्ता द्वारा हर घंटे कितनी बिजली उपयोग की जा रही है, यह जानकारी भी होगी।
बिजली बंद हुई तो मोबाइल पर उपभोक्ता को पता चल जाएगा। शिकायतों का समाधान जल्द होगा। 
प्रीपेड सुविधा भी होगी। अगर मीटर की क्षमता से ज्यादा लोड का उपयोग होता है तो भी जानकारी मिलेगी।

25 हजार का लक्ष्य
मीटर इतने हाईटेक होंगे कि किसी भी तरह की गड़बड़ होने पर कंट्रोल रूम में अलार्मिंग लाइट ब्लिंक करने लगेगी। संबंधित अधिकारियों को भी मोबाइल पर मैसेज मिल जाएगा। दिसंबर तक 25 हजार मीटर लगाने का लक्ष्य है। - आकाश त्रिपाठी एमडी, मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

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